छत्तीसगढ़ की 14 हाई प्रोफाइल सीटें: मुख्यमंत्री के सामने सगे भतीजे की चुनौती, दो पूर्व आईएएस भी हैं चुनावी मैदान में


मुख्यमंत्री के सामने सगे भतीजे की चुनौती,
दो पूर्व आईएएस भी हैं चुनावी मैदान में


छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण की 70 विधानसभा सीटों मतदान हो चुका है। मतदाता चुनाव में उतरे 958 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर चुके है, जिनमें कई मंत्री और पूर्व मंत्री भी शमिल हैं। सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश की ऐसी ही हॉट सीटों की हैं।  ऐसे में आज हम जानने वाले हैं छत्तीसगढ़ की 14 हाई प्रोफाइल सीटों के बारे में...। इन सीटों पर प्रमुख चेहरा कौन है? सीट चर्चा में क्यों? आइये जानते हैं सब कुछ....



1. पाटन  छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीट पाटन है। यहां से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस की तरफ से मैदान में हैं। वहीं सीएम के खिलाफ भाजपा ने भूपेश के भतीजे विजय बघेल को टिकट दिया है। चाचा-भतीजे की सियासी जंग ने इस सीट को सबसे चर्चित सीट बना दिया है।  पाटन सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें साल 1993 से लेकर अब तक छह बार चुनावी मैदान में उतार चुकी है, जिनमें वो पांच बार बाजी मारी है। वहीं पिछले तीन नतीजों पर गौर करें तो वर्ष 2008 में एक बार भाजपा का खाता खुला था।


2. अंबिकापुर उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की दावेदारी से अंबिकापुर सीट सुर्खियों में है। उपमुख्यमंत्री का चुनावी हलफनामा भी चर्चा का विषय रहा, जिसमें उन्होंने अपनी कुल 447 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई है। अबकी बार टीएस 'बाबा' का मुकाबला भाजपा के राजेश अग्रवाल से है।  इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में तस्वीर लगभग एक जैसी ही रही है। तीनों ही बार कांग्रेस से टीएस सिंहदेव और भाजपा से भजपा अनुराग सिंहदेव आमने-सामने दिखे। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में टीएस सिंहदेव  बाजी मारी।


3. सक्ती यहां से विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने पहली ही सूची में विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत को सक्ती से फिर से टिकट दिया था। महंत के सामने भाजपा ने खिलावन साहू को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।  यहां बीते तीन में से दो मुकाबलों में कांग्रेस का पड़ला भारी रहा है।



4. दुर्ग ग्रामीण छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस के टिकट पर दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा ने ललित चंद्राकर को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर पिछले तीन में से दो चुनावों में भाजपा को जीत मिली है, जबकि पिछली बार ही कांग्रेस ने सफलता हासिल की थी।


5. रायगढ़  छत्तीसगढ़ विधानसभा की वीआईपी सीटों में से इस बार रायगढ़ सीट पर सबकी निगाह टिकी है। यहां इस बार फिर पूर्व आईएएस ओपी चौधरी रायगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भाजपा ने उनकी सीट बदल दी है। इस बार पार्टी उन्हें खरसिया की जगह रायगढ़ से चुनाव लड़ा रही है। ओपी चौधरी के सामने कांग्रेस से प्रकाश शक्रजीत नाइक हैं। 


6. खरसिया यह ऐसी सीट है जहां आजादी के बाद से अब तक भाजपा नहीं जीत पाई है। छत्तीसगढ़ का खरसिया भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर रमन सरकार में नगरीय निकाय मंत्री रहे अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। इस बार यहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक उमेश पटेल का मुकाबला भाजपा के महेश साहू से होगा।


7. कोटा
कोटा उन सीटों में शामिल है जहां राजघराने से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां जशपुर राजघराने से आने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बीजेपी के दिग्गज नेता रहे दिलीप सिंह जुदेव के बेटे हैं। कांग्रेस ने अटल श्रीवास्तव को टिकट दिया है। यहीं से वर्तमान विधायक और जनता कांग्रेस के संस्थापक अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी चुनाव मैदान में हैं।


8. रायपुर नगर दक्षिण
इस चुनाव में राजधानी के रण पर भी सबकी नजर होगी, क्योंकि यहां प्रदेश की राजनीति में खासा दखल रखने वाले नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां की चर्चित सीट रायपुर नगर दक्षिण की बात करें तो 1990 से लगातार सातवीं बार विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को आठवीं जीत से रोकने के लिए कांग्रेस ने दूधाधारी मठ के मठाधीश महंत रामसुंदर दास को मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी महंत रामसुंदर दास वर्तमान में गोसेवा आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
पिछले तीन चुनाव के समीकरण देखें तो तीनों बार भाजपा के टिकट पर पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने जीत दर्ज की है।


9. रायपुर पश्चिम
भाजपा के पूर्व मंत्री रहे राजेश मूणत और कांग्रेस से वर्तमान विधायक विकास उपाध्याय आमने-सामने हैं। पिछले चुनाव में मूणत की लगातार तीन जीत का क्रम तोड़ते हुए विकास ने सफलता हासिल की थी। वहीं पिछले चुनाव में कांग्रेस को विकास उपाध्याय ने मूणत के सामने 12,212 वोटों से जीत दिलाई थी।


10. राजिम
इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के अमितेश शुक्ल का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रोहित साहू से है। बीते चुनावों पर नजर डालें तो 2008 में अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में संतोष उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी को सफलता दिलाई। वहीं पिछली बार अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को जीत हासिल की थी।


12. चन्द्रपुर चन्द्रपुर सीट से भाजपा ने जशपुर राजघराने से आने वाली संयोगिता सिंह जूदेव को उतारा है। वहीं कांग्रेस ने राम कुमार यादव को चुनाव लड़ाया है। 2018 में कांग्रेस के राम कुमार यादव को चुनाव में जीत मिली थी।


13. साजा

कांग्रेस ने दिग्गज नेता रवीन्द्र चौबे को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने एक गैर राजनीति व्यक्ति ईश्वर साहू को टिकट दिया है। इसी साल सांप्रदायिक हिंसा में ईश्वर के बेटे की जान चली गई थी।


14.केशकाल यहां भाजपा ने कोंडागांव जिले के पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को उम्मीदवार बनाया है। छत्तीसगढ़ के 2008 बैच के IAS ऑफिसर नीलकंठ टेकाम के वीआरएस के आवेदन पर केंद्र सरकार ने 17 अगस्त 2023 को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद वह भाजपा में शामिल हुए थे। नीलकंठ के सामने कांग्रेस से संत राम नेताम हैं।



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